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vishnu 2.8.107: इस प्रकार भगवान विष्णु का यह शुद्ध तृतीय लोक (ध्रुव) तीनों लोकों का आधार और वर्षा का मूल कारण है ॥107॥   |   vishnu अध्याय 2.8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  2.8.107 
एवमेतत्पदं विष्णोस्तृतीयममलात्मकम्।
आधारभूतं लोकानां त्रयाणां वृष्टिकारणम्॥ १०७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान विष्णु का यह शुद्ध तृतीय लोक (ध्रुव) तीनों लोकों का आधार और वर्षा का मूल कारण है ॥107॥
 
In this manner, this pure third world (Dhruv) of Lord Vishnu is the foundation of the three worlds and the root cause of rain. ॥107॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)