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दिवीव चक्षुराततं योगिनां तन्मयात्मनाम्।
विवेकज्ञानदृष्टं च तद्विष्णो: परमं पदम्॥ १०३॥
अनुवाद
जो तल्लीन योगियों को आकाश में देदीप्यमान सूर्य के समान सबको प्रकाशित करने वाला प्रतीत होता है और जो केवल विवेक और ज्ञान से ही देखा जा सकता है, वह भगवान विष्णु का परम पद है ॥103॥
The one who appears to the engrossed yogis as the illuminator of all like the resplendent Sun in the sky and which is visible only through discrimination and knowledge, is the supreme position of Lord Vishnu. 103॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥