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vishnu 2.8.102: हे मैत्रेय! यह भूत, वर्तमान और भविष्यत् चर और अचर जगत जिसमें व्याप्त है, वही भगवान विष्णु का परम धाम है॥102॥   |   vishnu अध्याय 2.8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  2.8.102 
यत्रोतमेतत्प्रोतं च यद्भूतं सचराचरम्।
भाव्यं च विश्वं मैत्रेय तद्विष्णो: परमं पदम्॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! यह भूत, वर्तमान और भविष्यत् चर और अचर जगत जिसमें व्याप्त है, वही भगवान विष्णु का परम धाम है॥102॥
 
O Maitreya! The one in which this past, present and future animate and inanimate world is permeated is the ultimate abode of Lord Vishnu.॥102॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)