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अपुण्यपुण्योपरमे क्षीणाशेषाप्तिहेतव:।
यत्र गत्वा न शोचन्ति तद्विष्णो: परमं पदम्॥ १००॥
अनुवाद
पाप-पुण्य और जन्म-मरण के समस्त कारणों के नष्ट हो जाने पर, जहाँ जाकर प्राणी शोक नहीं करते, वह भगवान विष्णु का परम धाम है ॥100॥
After the sins and virtues are removed and all the causes of birth and death, the place where living beings go and do not lament is the ultimate abode of Lord Vishnu. ॥100॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥