श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.7.43 
कर्ता क्रियाणां स च इज्यते क्रतु:
स एव तत्कर्मफलं च तस्य।
स्रुगादि यत्साधनमप्यशेषं
हरेर्न किञ्चिद्‍व्यतिरिक्तमस्ति॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
वे ही सम्पूर्ण अनुष्ठानों के कर्ता हैं, यज्ञरूप में जिनकी पूजा की जाती है, वे ही इन समस्त यज्ञों के फल हैं तथा स्रुवा आदि यज्ञ के साधन भी हरि के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं हैं ॥ 43॥
 
He is the doer of all the rituals, He is the one who is worshipped in the form of Yagya, He is the result of all these Yagyas, and the instruments of Yagya like Sruva etc. are also nothing other than Hari. ॥ 43॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे द्वितीयेंऽशे सप्तमोऽध्याय:॥ ७॥
 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd