| श्री विष्णु पुराण » अंश 2: द्वितीय अंश » अध्याय 7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त » श्लोक 42 |
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| | | | श्लोक 2.7.42  | स एव मूलप्रकृतिर्व्यक्तरूपी जगच्च स:।
तस्मिन्नेव लयं सर्वं याति तत्र च तिष्ठति॥ ४२॥ | | | | | | अनुवाद | | वे ही अव्यक्त मूल प्रकृति हैं, वे ही व्यक्त जगत् हैं, उनमें ही सम्पूर्ण जगत् लीन है और उनकी शरण में स्थित है ॥ 42॥ | | | | He is the unmanifested original nature, He is the manifested universe, in Him the entire universe is absorbed and rests under His shelter. ॥ 42॥ | | ✨ ai-generated | | |
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