Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 2.7.36-39: हे मुनिसातम्! जैसे धान के बीज में मूल, नाल, पत्ते, अंकुर, तना, कोष, पुष्प, दूध, तना, कली और कण सभी रहते हैं; और बीजों के अंकुरण के लिए उत्तरदायी पदार्थ (भूमि और जल आदि) को पाकर वे प्रकट हो जाते हैं, वैसे ही अपने नाना प्रकार के पूर्वकर्मों में स्थित देवता भी विष्णु-शक्ति का आश्रय पाकर प्रकट हो जाते हैं॥37-39॥ | vishnu अध्याय 2.7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त । vishnu अंश 2: द्वितीय अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे मुनिसातम्! जैसे धान के बीज में मूल, नाल, पत्ते, अंकुर, तना, कोष, पुष्प, दूध, तना, कली और कण सभी रहते हैं; और बीजों के अंकुरण के लिए उत्तरदायी पदार्थ (भूमि और जल आदि) को पाकर वे प्रकट हो जाते हैं, वैसे ही अपने नाना प्रकार के पूर्वकर्मों में स्थित देवता भी विष्णु-शक्ति का आश्रय पाकर प्रकट हो जाते हैं॥37-39॥
Hey Munisatam! Just as the root, cord, leaves, shoot, stem, corpus, flower, milk, stem, bud and particles all reside in the seed of paddy; And when they get the material [land and water etc.] which are responsible for the germination of seeds, they become manifest, in the same way, the deities present in their various past actions become manifest after getting the shelter of Vishnu-Shakti. 37-39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥