श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.7.35 
बीजाद‍्वृक्षप्ररोहेण यथा नापचयस्तरो:।
भूतानां भूतसर्गेण नैवास्त्यपचयस्तथा॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जैसे बीज से उत्पन्न वृक्ष अपने पूर्व वृक्ष को कोई हानि नहीं पहुँचाता, वैसे ही अन्य प्राणियों के उत्पन्न होने पर उन्हें जन्म देने वाले जीवों को कोई हानि नहीं पहुँचती ॥35॥
 
Just as a tree sprouting from its seed does not cause any harm to the previous tree, similarly, the creatures who give birth to them do not suffer any loss when other creatures are born. ॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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