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श्लोक 2.7.31  |
यथा सक्तं जले वातो बिभर्त्ति कणिकाशतम्।
शक्ति: सापि तथा विष्णो: प्रधानपुरुषात्मकम्॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| जैसे वायु जल के संपर्क में आने पर सैकड़ों जल कणों को धारण कर लेती है, वैसे ही भगवान विष्णु की शक्ति भी प्रमुख पुरुषों से बने हुए संसार को धारण करती है ॥31॥ |
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| Just as air holds hundreds of water particles on coming in contact with water, similarly the energy of Lord Vishnu also holds the world made up of the chief men. ॥ 31॥ |
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