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vishnu 2.7.28: जैसे लकड़ी में अग्नि और तिल में तेल विद्यमान रहता है, वैसे ही स्वयंप्रकाश आत्मा सर्वव्यापी मनुष्य में विद्यमान रहता है ॥28॥   |   vishnu अध्याय 2.7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.7.28 
दारुण्यग्निर्यथा तैलं तिले तद्वत्पुमानपि।
प्रधानेऽवस्थितो व्यापी चेतनात्मात्मवेदन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जैसे लकड़ी में अग्नि और तिल में तेल विद्यमान रहता है, वैसे ही स्वयंप्रकाश आत्मा सर्वव्यापी मनुष्य में विद्यमान रहता है ॥28॥
 
Just as fire is present in wood and oil in sesame, so the self-illuminating soul is present in the all-pervasive human being. ॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)