Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 2.7.24: अग्नि वायु से घिरा हुआ है, वायु आकाश से घिरा हुआ है, आकाश तामस अहंकार से घिरा हुआ है और अहंकार तत्त्वों के कारण महातत्त्व से घिरा हुआ है। हे मैत्रेय! ये सात क्रमशः एक-दूसरे से दस-दस गुना अधिक हैं॥ 24॥ | vishnu अध्याय 2.7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त । vishnu अंश 2: द्वितीय अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अग्नि वायु से घिरा हुआ है, वायु आकाश से घिरा हुआ है, आकाश तामस अहंकार से घिरा हुआ है और अहंकार तत्त्वों के कारण महातत्त्व से घिरा हुआ है। हे मैत्रेय! ये सात क्रमशः एक-दूसरे से दस-दस गुना अधिक हैं॥ 24॥
Fire is surrounded by air and air is surrounded by space, and space is surrounded by Tamasic ego and ego is surrounded by Mahatattva due to elements. O Maitreya! These seven are successively ten times more than each other.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥