श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.7.23 
दशोत्तरेण पयसा मैत्रेयाण्डं च तद‍्वृतम्।
सर्वोऽम्बुपरिधानोऽसौ वह्निना वेष्टितो बहि:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! यह अण्ड अपने आकार से दसगुने जल से ढका हुआ है और वह सम्पूर्ण जल का आवरण अग्नि से घिरा हुआ है॥ 23॥
 
O Maitreya, this egg is covered by water ten times its size, and that entire covering of water is surrounded by fire.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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