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श्लोक 2.7.22  |
एतदण्डकटाहेन तिर्यक् चोर्ध्वमधस्तथा।
कपित्थस्य यथा बीजं सर्वतो वै समावृतम्॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| यह जगत् कथे के बीज के समान है और ऊपर-नीचे सब ओर से अण्डकता से घिरा हुआ है ॥22॥ |
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| This universe is like the seed of Kapitha (Kathe) and is surrounded by Andakatah on all sides, above and below. ॥22॥ |
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