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vishnu 2.7.20: इन कृतक और अकृतक त्रिलोकी के मध्य में महर्लोक कहा गया है, जो कल्प के अन्त में ही जनशून्य हो जाता है और पूर्णतः नष्ट नहीं होता [इसलिए इसे 'कृतककृत' कहते हैं] ॥20॥   |   vishnu अध्याय 2.7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.7.20 
कृतकाकृतयोर्मध्ये महर्लोक इति स्मृत:।
शून्यो भवति कल्पान्ते योऽत्यन्तं न विनश्यति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इन कृतक और अकृतक त्रिलोकी के मध्य में महर्लोक कहा गया है, जो कल्प के अन्त में ही जनशून्य हो जाता है और पूर्णतः नष्ट नहीं होता [इसलिए इसे 'कृतककृत' कहते हैं] ॥20॥
 
In the middle of these Kritak and Akritak triloki is called Maharlok, which only becomes void of people at the end of the Kalpa and does not get completely destroyed [hence it is called 'Kritakakrit']. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)