श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.7.19 
त्रैलोक्यमेतत्कृतकं मैत्रेय परिपठॺते।
जनस्तपस्तथा सत्यमिति चाकृतकं त्रयम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! ये (भूः, भुवः, स्वः) 'कृतक' त्रैलोक्य कहलाते हैं तथा जन, तप और सत्य- ये तीन 'अकृतक' लोक हैं। 19॥
 
O Maitreya! These (Bhuh, Bhuvah, Swah) are called 'Kritaka' Trilokya and Jana, Tapa and Satya - these three are 'Akritak' worlds. 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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