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vishnu 2.6.38: हे मैत्रेय! स्वायंभुव मनु आदि स्मृतिकारों ने महान पापों के लिए महान प्रायश्चित और लघु पापों के लिए लघु प्रायश्चित की व्यवस्था की है। 38.   |   vishnu अध्याय 2.6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.6.38 
पापे गुरूणि गुरुणि स्वल्पान्यल्पे च तद्विद:।
प्रायश्चित्तानि मैत्रेय जगु: स्वायम्भुवादय:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! स्वायंभुव मनु आदि स्मृतिकारों ने महान पापों के लिए महान प्रायश्चित और लघु पापों के लिए लघु प्रायश्चित की व्यवस्था की है। 38.
 
O Maitreya! The writers of Smriti like Svayambhuva Manu have arranged for great atonement for great sins and small atonement for small sins. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)