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vishnu 2.6.37: महर्षियों ने वेदों का अर्थ स्मरण करके भिन्न-भिन्न पापों के लिए भिन्न-भिन्न तपों का वर्णन किया है ॥37॥   |   vishnu अध्याय 2.6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.6.37 
पापानामनुरूपाणि प्रायश्चित्तानि यद्यथा।
तथा तथैव संस्मृत्य प्रोक्तानि परमर्षिभि:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
महर्षियों ने वेदों का अर्थ स्मरण करके भिन्न-भिन्न पापों के लिए भिन्न-भिन्न तपों का वर्णन किया है ॥37॥
 
The great sages have explained the various penances for different sins after recalling the meaning of the Vedas. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)