श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.6.34 
स्थावरा: कृमयोऽब्जाश्च पक्षिण: पशवो नरा:।
धार्मिकास्त्रिदशास्तद्वन्मोक्षिणश्च यथाक्रमम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
पापी लोग नरक की गति में जीव, कृमि, जलचर, पक्षी, पशु, मनुष्य, धार्मिक व्यक्ति, देवता और मुमुक्षु के रूप में जन्म लेते हैं ॥34॥
 
Sinners take birth as a living being, a worm, an aquatic animal, a bird, an animal, a human being, a religious person, a deity and a mumukshu in the order of hell. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)