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vishnu 2.6.29: जो ब्रह्मचारी दिन में या सोते समय (बुरी नीयत से) वीर्यपात करते हैं, या अपने पुत्रों के साथ अध्ययन करते हैं, वे 'स्वभूजन' नामक नरक में गिरते हैं।   |   vishnu अध्याय 2.6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.6.29 
दिवा स्वप्ने च स्कन्दन्ते ये नरा ब्रह्मचारिण:।
पुत्रैरध्यापिता ये च ते पतन्ति श्वभोजने॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जो ब्रह्मचारी दिन में या सोते समय (बुरी नीयत से) वीर्यपात करते हैं, या अपने पुत्रों के साथ अध्ययन करते हैं, वे 'स्वभूजन' नामक नरक में गिरते हैं।
 
Those brahmacārīs who ejaculate during the day or while sleeping [with evil intentions], or who study with their own sons, fall into the hell of 'swabhūjān'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)