Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 2.6.15: जो देवता, द्विज और पितरों से द्वेष रखता है तथा रत्नों को दूषित करता है, वह कृमिभक्षक नरक में जाता है और जो दुष्ट यज्ञ करता है, वह कृमिभक्षक नरक में जाता है ॥15॥ | vishnu अध्याय 2.6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन । vishnu अंश 2: द्वितीय अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवद्विजपितृद्वेष्टा रत्नदूषयिता च य:।
स याति कृमिभक्षे वै कृमीशे च दुरिष्टकृत्॥ १५॥
अनुवाद
जो देवता, द्विज और पितरों से द्वेष रखता है तथा रत्नों को दूषित करता है, वह कृमिभक्षक नरक में जाता है और जो दुष्ट यज्ञ करता है, वह कृमिभक्षक नरक में जाता है ॥15॥
The one who has hatred towards Gods, Dwijas and ancestors and the one who contaminates gems goes to the worm-eater's hell and the one who performs evil yagya goes to the worm-eater's hell. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥