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vishnu 2.5.6: उस पाताल लोक की तुलना किससे की जा सकती है, जहाँ सर्पों के आभूषण सुन्दर चमक वाले और आनन्द देने वाले श्वेत रत्नों से जड़े हुए हैं? ॥6॥   |   vishnu अध्याय 2.5: सात पाताललोकोंका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 5: सात पाताललोकोंका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.5.6 
आह्लादकारिण: शुभ्रा मणयो यत्र सुप्रभा:।
नागाभरणभूषासु पातालं केन तत्समम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उस पाताल लोक की तुलना किससे की जा सकती है, जहाँ सर्पों के आभूषण सुन्दर चमक वाले और आनन्द देने वाले श्वेत रत्नों से जड़े हुए हैं? ॥6॥
 
To what can that netherworld be compared, where the ornaments of the serpents are studded with white gems having a beautiful luster and bringing joy? ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)