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vishnu 2.5.19: कल्पान्त में जिनके मुख से विषैली ज्वाला के समान देदीप्यमान संकर्षण नामक रुद्र प्रकट होते हैं, जो तीनों लोकों को भस्म कर देते हैं ॥19॥   |   vishnu अध्याय 2.5: सात पाताललोकोंका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 5: सात पाताललोकोंका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.5.19 
कल्पान्ते यस्य वक्त्रेभ्यो विषानलशिखोज्ज्वल:।
संकर्षणात्मको रुद्रो निष्क्रम्यात्ति जगत्त्रयम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
कल्पान्त में जिनके मुख से विषैली ज्वाला के समान देदीप्यमान संकर्षण नामक रुद्र प्रकट होते हैं, जो तीनों लोकों को भस्म कर देते हैं ॥19॥
 
In Kalpanta, from whose mouth comes Rudra named Sankarshana, resplendent like a poisonous flame, who devours all the three worlds. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)