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vishnu 2.5.16: उसके नेत्र नशे के कारण लाल हैं, वह सदैव एक ही कुण्डल पहने रहता है, तथा मुकुट और माला आदि धारण करता है, तथा आग में जलते हुए श्वेत पर्वत के समान शोभा पाता है ॥16॥   |   vishnu अध्याय 2.5: सात पाताललोकोंका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 5: सात पाताललोकोंका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.5.16 
मदाघूर्णितनेत्रोऽसौ य: सदैवैककुण्डल:।
किरीटी स्रग्धरो भाति साग्नि: श्वेत इवाचल:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उसके नेत्र नशे के कारण लाल हैं, वह सदैव एक ही कुण्डल पहने रहता है, तथा मुकुट और माला आदि धारण करता है, तथा आग में जलते हुए श्वेत पर्वत के समान शोभा पाता है ॥16॥
 
His eyes are red due to intoxication, he always wears a single earring, and wears a crown and garland etc., and looks as beautiful as a white mountain on fire. ॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)