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vishnu 2.5.15: जो अपने फन पर स्थित सहस्त्र मणियों से सम्पूर्ण दिशाओं को प्रकाशित करते हुए जगत् के कल्याण के लिए समस्त दैत्यों को नपुंसक बनाते रहते हैं ॥15॥   |   vishnu अध्याय 2.5: सात पाताललोकोंका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 5: सात पाताललोकोंका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.5.15 
फणामणिसहस्रेण य: स विद्योतयन्दिश:।
सर्वान‍्करोति निर्वीर्यान् हिताय जगतोऽसुरान्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो अपने फन पर स्थित सहस्त्र मणियों से सम्पूर्ण दिशाओं को प्रकाशित करते हुए जगत् के कल्याण के लिए समस्त दैत्यों को नपुंसक बनाते रहते हैं ॥15॥
 
Who, illuminating all directions with the thousand gems on his hoods, continues to render all the demons impotent for the welfare of the world. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)