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vishnu 2.3.25: जो मनुष्य इस कर्मभूमि में जन्म लेकर अपने निष्फल कर्मों को परम भगवान श्री विष्णु को अर्पित करके पवित्र (पाप-पुण्य से मुक्त) होकर अनंत में लीन हो जाते हैं [वे धन्य हैं!]॥25॥   |   vishnu अध्याय 2.3: भारतादि नौ खण्डोंका विभाग   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 3: भारतादि नौ खण्डोंका विभाग  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.3.25 
कर्माण्यसङ्कल्पिततत्फलानि
संन्यस्य विष्णौ परमात्मभूते।
अवाप्य तां कर्ममहीमनन्ते
तस्मिँल्लयं ये त्वमला: प्रयान्ति॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य इस कर्मभूमि में जन्म लेकर अपने निष्फल कर्मों को परम भगवान श्री विष्णु को अर्पित करके पवित्र (पाप-पुण्य से मुक्त) होकर अनंत में लीन हो जाते हैं [वे धन्य हैं!]॥25॥
 
Those who, after taking birth in this land of work and offering their fruitless deeds to the Supreme Lord Shri Vishnu, become pure (free from sins and virtues) and merge in the infinite [they are blessed!]॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)