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vishnu 2.16.18: हे महामुनि! ‘सम्पूर्ण पदार्थों में अद्वैत आत्म-चेतना रखना’ यही परम सत्य का सार है, जिसका उपदेश मैंने आपको संक्षेप में दिया है॥18॥   |   vishnu अध्याय 2.16: ऋभुकी आज्ञासे निदाघका अपने घरको लौटना   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 16: ऋभुकी आज्ञासे निदाघका अपने घरको लौटना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.16.18 
तदेतदुपदिष्टं ते सङ्क्षेपेण महामते।
परमार्थसारभूतं यत्तदद्वैतमशेषत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! ‘सम्पूर्ण पदार्थों में अद्वैत आत्म-चेतना रखना’ यही परम सत्य का सार है, जिसका उपदेश मैंने आपको संक्षेप में दिया है॥18॥
 
O great sage! 'Keeping the non-dual self-consciousness in all objects' is the essence of the ultimate truth which I have preached to you in brief.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)