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तदेतदुपदिष्टं ते सङ्क्षेपेण महामते।
परमार्थसारभूतं यत्तदद्वैतमशेषत:॥ १८॥
अनुवाद
हे महामुनि! ‘सम्पूर्ण पदार्थों में अद्वैत आत्म-चेतना रखना’ यही परम सत्य का सार है, जिसका उपदेश मैंने आपको संक्षेप में दिया है॥18॥
O great sage! 'Keeping the non-dual self-consciousness in all objects' is the essence of the ultimate truth which I have preached to you in brief.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥