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vishnu 2.16.17: ऋभु बोले - हे निदाघ! पहले तुमने मेरी बहुत सेवा की थी और मेरा बहुत आदर किया था, अतः तुम्हारे स्नेह के कारण मैं, ऋभु नामक तुम्हारा गुरु, तुम्हें उपदेश देने आया हूँ।   |   vishnu अध्याय 2.16: ऋभुकी आज्ञासे निदाघका अपने घरको लौटना   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 16: ऋभुकी आज्ञासे निदाघका अपने घरको लौटना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.16.17 
ऋभुरुवाच
तवोपदेशदानाय पूर्वशुश्रूषणादृत:।
गुरुस्नेहादृभुर्नाम निदाघ समुपागत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
ऋभु बोले - हे निदाघ! पहले तुमने मेरी बहुत सेवा की थी और मेरा बहुत आदर किया था, अतः तुम्हारे स्नेह के कारण मैं, ऋभु नामक तुम्हारा गुरु, तुम्हें उपदेश देने आया हूँ।
 
Ribhu said - O Nidagh! Earlier you had served me and respected me a lot, so due to your affection I, your Guru named Ribhu, have come to give you advice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)