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vishnu 2.15.7: हे पार्थिवोत्तम! प्राचीन काल में ऋभु के शिष्य योगवेत्ता निदाघ सुन्दर उद्यानों से सुशोभित उस नगर में रहते थे॥7॥   |   vishnu अध्याय 2.15: ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानोपदेश   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 15: ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानोपदेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.15.7 
रम्योपवनपर्यन्ते स तस्मिन्पार्थिवोत्तम।
निदाघो नाम योगज्ञ ऋभुशिष्योऽवसत्पुरा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे पार्थिवोत्तम! प्राचीन काल में ऋभु के शिष्य योगवेत्ता निदाघ सुन्दर उद्यानों से सुशोभित उस नगर में रहते थे॥7॥
 
Oh Parthivottam! In ancient times, Ribhu's disciple Yogaveta Nidagh lived in that city adorned with beautiful gardens. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)