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vishnu 2.15.5: हे मनुष्यों के स्वामी! ऋभु ने देखा कि सम्पूर्ण शास्त्रों का ज्ञान होने पर भी निदाघ को अद्वैत में श्रद्धा नहीं थी ॥5॥   |   vishnu अध्याय 2.15: ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानोपदेश   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 15: ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानोपदेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.15.5 
अवाप्तज्ञानतन्त्रस्य न तस्याद्वैतवासना।
स ऋभुस्तर्कयामास निदाघस्य नरेश्वर॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! ऋभु ने देखा कि सम्पूर्ण शास्त्रों का ज्ञान होने पर भी निदाघ को अद्वैत में श्रद्धा नहीं थी ॥5॥
 
O Lord of men! Ribhu saw that inspite of having knowledge of all the scriptures, Nidagha did not have faith in non-duality. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)