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श्लोक 2.15.36  |
ब्राह्मण उवाच
तथेत्युक्त्वा निदाघेन प्रणिपातपुर:सरम्।
पूजित: परया भक्त्या इच्छात: प्रययावृभु:॥ ३६॥ |
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| अनुवाद |
| ब्राह्मण ने कहा: तत्पश्चात निदाघ ने 'बहुत अच्छा' कहकर उन्हें प्रणाम किया और उनके द्वारा अत्यंत भक्तिपूर्वक पूजा किये जाने पर ऋभु अपनी इच्छानुसार चले गये। |
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| The Brahmin said: Thereafter Nidagha bowed to him saying 'very good' and after being worshipped by him with utmost devotion, Ribhu went away as per his wish. |
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| इति श्रीविष्णुपुराणे द्वितीयेंऽशे पञ्चदशोऽध्याय:॥ १५॥ |
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