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vishnu 2.15.32: ब्राह्मण बोला- हे राजन! उसके ऐसे पुण्यमय वचन सुनकर महानिदाघ ने उसे प्रणाम किया और कहा- ॥32॥   |   vishnu अध्याय 2.15: ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानोपदेश   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 15: ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानोपदेश  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.15.32 
ब्राह्मण उवाच
इत्याकर्ण्य वचस्तस्य परमार्थाश्रितं नृप।
प्रणिपत्य महाभागो निदाघो वाक्यमब्रवीत्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण बोला- हे राजन! उसके ऐसे पुण्यमय वचन सुनकर महानिदाघ ने उसे प्रणाम किया और कहा- ॥32॥
 
The Brahmin said— O King! Hearing such virtuous words from him, the great Nidagha bowed to him and said—॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)