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श्लोक 2.15.29  |
मृण्मयं हि गृहं यद्वन्मृदा लिप्तं स्थिरं भवेत्।
पार्थिवोऽयं तथा देह: पार्थिवै: परमाणुभि:॥ २९॥ |
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| अनुवाद |
| जैसे मिट्टी का बना हुआ घर मिट्टी से लीपने से मजबूत हो जाता है, वैसे ही यह पार्थिव शरीर पार्थिव अन्न के परमाणुओं से मजबूत हो जाता है ॥29॥ |
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| Just as a house made of mud becomes strong by plastering it with mud, similarly this earthly body becomes strong with the atoms of earthly food. ॥ 29॥ |
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