श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 15: ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानोपदेश  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.15.23 
क्व निवासस्तवेत्युक्तं क्व गन्तासि च यत्त्वया।
कुतश्चागम्यते तत्र त्रितयेऽपि निबोध मे॥ २३॥
 
 
अनुवाद
और तुमने पूछा, ‘तुम कहाँ रह रहे हो? तुम कहाँ जा रहे हो? और तुम कहाँ से आए हो?’ इसलिए इन तीन बातों के विषय में मेरी बात मत सुनो -॥23॥
 
And you asked, 'Where are you staying? Where are you going? And where have you come from?' So don't listen to me about these three things -॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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