श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 15: ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानोपदेश  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.15.22 
मनस: स्वस्थता तुष्टिश्चित्तधर्माविमौ द्विज।
चेतसो यस्य तत्पृच्छ पुमानेभिर्न युज्यते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
स्वास्थ्य और संतोष भी मन में ही विद्यमान हैं, अतः ये मन के गुण हैं; इनका व्यक्ति (आत्मा) से कोई संबंध नहीं है। अतः हे ब्राह्मण! जिसके ये गुण हैं, उसी से इनके विषय में पूछो॥ 22॥
 
Health and satisfaction also exist in the mind, hence these are the qualities of the mind; they have no relation with the person (soul). Therefore, O Brahmin! Ask about these from the one whose qualities these are.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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