श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 15: ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानोपदेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.15.20 
वह्निना पार्थिवे धातौ क्षपिते क्षुत्समुद्भव:।
भवत्यम्भसि च क्षीणे नृणां तृडपि जायते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जठराग्नि द्वारा पार्थिव (ठोस) धातुओं के क्षीण हो जाने से मनुष्य को भूख लगती है और जल के क्षीण हो जाने से उसे प्यास लगती है ॥20॥
 
Due to the depletion of earthly (solid) metals through gastric fire, man feels hungry and due to depletion of water, he experiences thirst. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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