श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 15: ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानोपदेश  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.15.14 
निदाघ उवाच
हे हे शालिनि मद‍्गेहे यत्किञ्चिदतिशोभनम्।
भक्ष्योपसाधनं मृष्टं तेनास्यान्नं प्रसाधय॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तब निदाघ ने अपनी पत्नी से कहा, 'हे घर की देवी! हमारे घर में जो भी उत्तम वस्तुएं उपलब्ध हैं, उनमें से उनके लिए उत्तम भोजन तैयार करो।' 14.
 
Then Nidagha said to his wife, 'O goddess of the house! Prepare the most delicious food for them from the best of the things available in our house.' 14.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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