श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 15: ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानोपदेश  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.15.12 
निदाघ उवाच
सक्तुयावकवाटॺानामपूपानां च मे गृहे।
यद्रोचते द्विजश्रेष्ठ तत्त्वं भुङ्क्ष्व यथेच्छया॥ १२॥
 
 
अनुवाद
निदाघ ने कहा, "हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मैंने अपने घर में सत्तू, जौ का दलिया, कंद, मूल, फल और पूरी तैयार कर रखी है। इनमें से जो चाहो खा लो।"
 
Nidagha said, "Oh best of Brahmins! I have prepared sattu, barley porridge, tubers, roots, fruits and puri in my house. Eat whatever you like from these."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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