Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 2.14.31: 'वह एक ही है, यद्यपि वह हमारे शरीर में तथा अन्य प्राणियों के शरीर में भी विद्यमान है' - इस प्रकार का विशेष ज्ञान ही परम सत्य है; द्वैतभाव वाले पुरुष ही परम सत्य के दर्शन करने वाले हैं ॥31॥ | vishnu अध्याय 2.14: जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद । vishnu अंश 2: द्वितीय अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्यात्मपरदेहेषु सतोऽप्येकमयं हि यत्।
विज्ञानं परमार्थोऽसौ द्वैतिनोऽतथ्यदर्शिन:॥ ३१॥
अनुवाद
'वह एक ही है, यद्यपि वह हमारे शरीर में तथा अन्य प्राणियों के शरीर में भी विद्यमान है' - इस प्रकार का विशेष ज्ञान ही परम सत्य है; द्वैतभाव वाले पुरुष ही परम सत्य के दर्शन करने वाले हैं ॥31॥
He is one, even though He exists in our body and in the body of other beings' - the special knowledge of this kind is the ultimate truth; the persons having dualistic feelings are the ones who have seen the ultimate truth. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥