श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 14: जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.14.29 
एको व्यापी सम: शुद्धो निर्गुण: प्रकृते: पर:।
जन्मवृद्धॺादिरहित आत्मा सर्वगतोऽव्यय:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
आत्मा एक है, सर्वव्यापी है, सम है, शुद्ध है, निर्गुण है और प्रकृति से परे है; वह जन्म और वृद्धि से रहित है, सर्वव्यापी है और अविनाशी है ॥29॥
 
The soul is one, all-pervading, equal, pure, without qualities and beyond nature; He is free from birth and growth, omnipresent and indestructible. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)