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तदेवाफलदं कर्म परमार्थो मतस्तव।
मुक्तिसाधनभूतत्वात्परमार्थो न साधनम्॥ २५॥
अनुवाद
यदि आप फल की अपेक्षा से रहित निष्काम कर्म को परम सत्य मानते हैं, तो चूंकि वह मोक्ष प्राप्ति का साधन है, इसलिए वह केवल साधन है, परम सत्य नहीं।
If you consider selfless action devoid of any expectation of result to be the ultimate truth, then since it is a means to the result of liberation, it is only a means and not the ultimate truth. 25.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥