श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 14: जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.14.22 
यत्तु निष्पाद्यते कार्यं मृदा कारणभूतया।
तत्कारणानुगमनाज्ज्ञायते नृप मृण्मयम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे नृप! जो कारणरूपी पृथ्वी का कार्य है, वह कारणका अनुचर होनेके कारण पृथ्वीरूप ही जाना जाता है ॥22॥
 
O Nripa! The thing which is the work of the earth in the form of a cause is known to be in the form of earth because it is a follower of the cause. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)