श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 14: जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.14.21 
ऋग्यजु:सामनिष्पाद्यं यज्ञकर्म मतं तव।
परमार्थभूतं तत्रापि श्रूयतां गदतो मम॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यदि आप ऋक्, यजु और समारूप आदि वेदों के संयोग से सम्पन्न यज्ञ को ही श्रेष्ठ मानते हैं, तो उसके विषय में मेरा यह मत है- 21॥
 
If you consider the yagya performed by combining the Vedas like Rik, Yaju and Samarup as supreme, then I have this opinion about it - 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)