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vishnu 2.14.20: यदि इस लोक में राज्य आदि की प्राप्ति को ही परमार्थ मान लिया जाए तो कभी ये रहते हैं और कभी नहीं रहते। अतः परार्थ भी अव्यावहारिक हो जाएगा। [इसलिए राज्य आदि भी परार्थ नहीं हो सकते]॥20॥   |   vishnu अध्याय 2.14: जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 14: जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.14.20 
राज्यादिप्राप्तिरत्रोक्ता परमार्थतया यदि।
परमार्था भवन्त्यत्र न भवन्ति च वै तत:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यदि इस लोक में राज्य आदि की प्राप्ति को ही परमार्थ मान लिया जाए तो कभी ये रहते हैं और कभी नहीं रहते। अतः परार्थ भी अव्यावहारिक हो जाएगा। [इसलिए राज्य आदि भी परार्थ नहीं हो सकते]॥20॥
 
If attainment of kingdom etc. in this world is considered as Paramarth then sometimes these remain and sometimes they do not remain. Hence altruism will also become impractical. [That's why even state etc. cannot be altruistic]॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)