श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 14: जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.14.18 
पुत्रश्चेत्परमार्थ: स्यात्सोऽप्यन्यस्य नरेश्वर।
परमार्थभूत: सोऽन्यस्य परमार्थो हि तत्पिता॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! यदि पुत्र को दान कहा जाए तो वह दूसरे का (अपने पिता का) दान है और यदि उसका पिता भी दूसरे का पुत्र है तो वह भी उसी का (अपने पिता का) दान होगा॥18॥
 
O Lord of men! If a son is called a charity then he is the charity of someone else (his father), and his father too being the son of someone else will be the charity of that person (his father).॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)