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vishnu 2.14.17: यदि धन दान है, तो फिर धर्म के लिए उसका त्याग क्यों किया जाता है? और इच्छित भोगों की प्राप्ति के लिए उसे क्यों व्यय किया जाता है? [अतः वह दान नहीं है]॥17॥   |   vishnu अध्याय 2.14: जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 14: जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.14.17 
धर्माय त्यज्यते किन्नु परमार्थो धनं यदि।
व्ययश्च क्रियते कस्मात्कामप्राप्त्युपलक्षण:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
यदि धन दान है, तो फिर धर्म के लिए उसका त्याग क्यों किया जाता है? और इच्छित भोगों की प्राप्ति के लिए उसे क्यों व्यय किया जाता है? [अतः वह दान नहीं है]॥17॥
 
If wealth is charity then why is it sacrificed for the sake of religion? And why is it spent to obtain the desired pleasures? [Therefore it is not charity]॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)