Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 2.14.16: इस प्रकार सैकड़ों-हजारों प्रकार के पुण्य हैं, परन्तु वे सब परम सत्य नहीं हैं। अब सुनो, परम सत्य क्या है -॥16॥ | vishnu अध्याय 2.14: जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद । vishnu अंश 2: द्वितीय अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रेयांस्येवमनेकानि शतशोऽथ सहस्रश:।
सन्त्यत्र परमार्थस्तु न त्वेते श्रूयतां च मे॥ १६॥
अनुवाद
इस प्रकार सैकड़ों-हजारों प्रकार के पुण्य हैं, परन्तु वे सब परम सत्य नहीं हैं। अब सुनो, परम सत्य क्या है -॥16॥
In this way there are hundreds and thousands of kinds of merits, but all of them are not the ultimate truth. Now listen to what is the ultimate truth -॥16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥