श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 14: जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.14.13 
देवताराधनं कृत्वा धनसम्पदमिच्छति।
पुत्रानिच्छति राज्यं च श्रेयस्तस्यैव तन्नृप॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जो मनुष्य देवताओं की पूजा करता है तथा धन, संपत्ति, पुत्र और राज्य की इच्छा रखता है, उसके लिए ये परम कल्याणकारी हैं॥13॥
 
O King! For a man who worships the gods and desires wealth, property, sons and a kingdom, they are the ultimate good. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)