श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 14: जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.14.11 
तन्मह्यं प्रणताय त्वं यच्छ्रेय: परमं द्विज।
तद्वदाखिलविज्ञानजलवीच्युदधिर्भवान‍्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अतः हे ब्राह्मण! जो कुछ हमारा परम कल्याण है, उसे आप विनम्रतापूर्वक मुझसे कहिए। हे प्रभु! आप समस्त ज्ञान तरंगों के सागर के समान हैं॥11॥
 
Therefore, O Brahmin! Whatever is our ultimate good, please tell me humbly. O Lord! You are like an ocean of all the waves of knowledge. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)