Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 2.13.96: इसी प्रकार छाते की तीलियों को अलग रखकर छाते का और उसके निवास स्थान का विचार करो। यही सिद्धांत तुम पर और मुझ पर भी लागू होता है [अर्थात् मेरा और तुम्हारा शरीर भी पंचभूतों के अतिरिक्त कुछ नहीं है] ॥96॥ | vishnu अध्याय 2.13: भरत-चरित्र । vishnu अंश 2: द्वितीय अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं छत्रशलाकानां पृथग्भावे विमृश्यताम्।
क्व यातं छत्रमित्येष न्यायस्त्वयि तथा मयि॥ ९६॥
अनुवाद
इसी प्रकार छाते की तीलियों को अलग रखकर छाते का और उसके निवास स्थान का विचार करो। यही सिद्धांत तुम पर और मुझ पर भी लागू होता है [अर्थात् मेरा और तुम्हारा शरीर भी पंचभूतों के अतिरिक्त कुछ नहीं है] ॥96॥
Similarly, keeping aside the spokes of the umbrella, think about the umbrella and where it resides. The same principle applies to you and me [that is, my and your bodies are also nothing other than the five elements]. ॥96॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥