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vishnu 2.13.88: तो क्या यह वाणी भी जीभ के समान कारणों से अपने को 'मैं' कहती है? नहीं। अतः ऐसी स्थिति में 'तुम मोटे हो' कहना उचित नहीं है। 88।   |   vishnu अध्याय 2.13: भरत-चरित्र   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  2.13.88 
किं हेतुभिर्वदत्येषा वागेवाहमिति स्वयम्।
अत: पीवानसीत्येतद्वक्तुमित्थं न युज्यते॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
तो क्या यह वाणी भी जीभ के समान कारणों से अपने को 'मैं' कहती है? नहीं। अतः ऐसी स्थिति में 'तुम मोटे हो' कहना उचित नहीं है। 88।
 
So does this speech itself call itself 'I' through reasons like the tongue? No. Hence, in such a situation, it is not right to say 'You are fat'. 88.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)